मशरूम की खेती कैसे करे – पूर्ण जानकारी

मशरूम की खेती कैसे करे

मशरूम की खेती कैसे करे – पूर्ण जानकारी

मशरूम एक प्रकार का कवक है जिसे कच्चा या पकाकर खाया जा सकता है। इनमे कैलोरी की मात्र कम होती है और इनमे बहुत सारे पोषक तत्व होते हैं। मशरूम कई जगहों जैसे जमीन, पेड़ के तने, छतों और यहां तक ​​कि इमारतों के किनारे पर भी पाए जा सकते हैं। मशरूम के हजारों प्रकार होते हैं लेकिन केवल 100 प्रकार के मशरूम ही खाए जा सकते हैं।

मशरूम की खेती का इतिहास-

ऐसा माना जाता है कि मशरूम की खेती चीन में शुरू हुई, जहां लोग चावल के प्लांट्स से बचे हुए भूसे का उपयोग करने के तरीकों की तलाश में थे। उन्होंने पाया कि इस भूसे का उपयोग मशरूम उगाने के लिए एक सब्सट्रेट के रूप में किया जा सकता है।

मशरूम की पहली खेती चीन में हान राजवंश (206 ईसा पूर्व-220 ईस्वी) के दौरान हुई थी। सबसे पहले एक चीनी हर्बल पुस्तक में मशरूम की खेती के इस अवधि के होने के लेख प्रलेखित है। मशरूम की खेती से पहली बार व्यावसायिक रूप से 1781 में चीन में उपयोग हुआ था।

भारत मे मशरूम की खेती-

भारत में मशरूम की खेती पिछले कुछ वर्षों में बढ़ रही है। इस वृद्धि का मुख्य कारण अन्य सब्जियों और फलों की तुलना में मशरूम की उच्च मांग और कम उत्पादन लागत है।

भारत सरकार खाद्य उत्पादन बढ़ाने और आलू और प्याज जैसी अन्य सब्जियों के आयात को कम करने के लिए मशरूम की खेती को बढ़ावा दे रही है।

मशरूम की प्रचलित नसले-

भारत में उगाए जाने वाले मशरूम की कुछ सामान्य किस्में हैं:

-सफेद बटन मशरूम (White Button Mushroom )

-शिटाके मशरूम (Shiitake Mushrooms)

-पोर्टोबेलो मशरूम (Portobello Mushrooms )

-ऑइस्टर मशरूम (Oyster Mushroom)

भारत मे ज्यादातर बटन मशरूम की खेती होती है क्युकी मार्केट मे सबसे ज्यादा मांग बटन मशरूम की ही होती है।

मशरूम की खेती का सीजन-

मशरूम की खेती के लिए ठंडी का समय सबसे अनुकूल होता है, ज्यादातर किसान हल्की ठंडी पड़ते ही इसकी खेती शुरू कर देते है। खेती शुरू करने के लगभग 30-35 दिन मे ही पहली फसल तैयार हो जाती है। एक सीजन मे तीन से चार बार फसल निकाल सकते है।

बड़े पैमाने पर मशरूम की खेती करने के लिए कई किसान एसी प्लांट भी लगाते है। जिसमे वो अपने मन मुताबिक तापमान को नियंत्रित कर सकते है। ऐसे प्लांट्स मे साल भर मशरूम की खेती की जा सकती है।

मशरूम की खेती की विधि-

मशरूम की खेती के लिए एक शेड की आवश्यकता होती है, बाजार से आपको पहले से ही तैयार कम्पोस्ट बैग मिलता है। कम्पोस्ट बिना बीज के और बीज के साथ अलग अलग आता है, यदि आप बिना बीज वाला कम्पोस्ट लेते है तो बीज खुद से ही मिलना पड़ेगा जिसके लिए सही अनुपात का पता होना बहुत आवस्यक है। अत: मुमकिन हो तो बीज वाला ही कम्पोस्ट खरीदना चाहिये। तत्कालीन मशरूम की कम्पोस्ट का दाम लगभग 80-100 रुपये प्रति बैग है।

अगर आप बीज को अलग से खरीदना चाहे तो अलग अलग नस्लों के बीज का दाम भी अलग अलग होता है पर औसतन ये 50-70 रुपये प्रति 100 ग्राम पड़ता है। कम्पोस्ट बैग्स खरीदने के बाद इन सभी बैग्स को शेड मे बनाए बेडस पर ध्यान से लगा देना है। शेड मे ठंडा वातावरण होना चाहिये (25 डिग्री सेल्सियस से कम) और 90% नमी की भी आवश्यकता होती है।

मशरूम की खेती
मशरूम की खेती

इसके बाद हम कोई भी अलग से खाद या दावा नहीं डालते है और कोई बीमारी न लग जाए इसका ध्यान देते है। फसल निकालने के बाद बची कम्पोस्ट को हम जैविक खाद के रूप मे अन्य फसलों मे इस्तेमाल कर सकते है।

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मशरूम की बीमारियां-

कई बीमारियां हैं जो मशरूम के उत्पादन को प्रभावित करती हैं और वे दो श्रेणियों में आती हैं: संक्रामक और गैर-संक्रामक। संक्रामक रोगों में बैक्टीरियल स्पॉट डिजीज, ब्राउन रोट डिजीज, व्हाइट रोट डिजीज, पिंक मोल्ड डिजीज और येलो मोल्ड डिजीज शामिल हैं।

गैर-संक्रामक रोगों में पानी की कमी या उच्च तापमान (सूखापन) से सूखना, बहुत अधिक देख रेख से चोट लगना (chilling injury), और बहुत लंबे समय तक अत्यधिक तापमान के संपर्क में रहने से खत्म होना (thermal injury) शामिल हैं।

मशरूम की मार्केटिंग-

मशरूम उगाने के बाद किसान भाइयों के सामने उसकी मार्केटिंग की बड़ी समस्या होती है, आप मशरूम को लोकल सब्जी मार्केट मे बेच सकते है, आपने मशरूम को प्लास्टिक के बंद बोक्सेस मे बिकते देखा होगा। यह काम चाहे तो आप खुद से कर सकते है पर इसमे समय की व्यस्तता ज्यादा है।

अगर आपके आस पास कोई कैनिंग प्लांट या कोई फूड प्रोसेसिंग प्लांट है तो आप आसानी से अपना माल वहा पर बेच सकते है। कैनिंग प्लांट्स मशरूम को छोटे डब्बों मे कुछ रासायनिक क्रियाओ द्वारा बंद करके उसे लंबे समय तक उपयोग करने लायक बनाने का कार्य करते है। बहुत सारे मशरूम के किसान अपने आस पास की जगहों के होटेल्स और मिठाई भंडारों से सीधा टाइ-अप कर लेते है और अपना सारा माल इन्हे ही बेच देते है।

अंत में, मशरूम की खेती पैसा कमाने का एक अच्छा तरीका है। यह कृषि का एक स्थायी रूप भी है जिसमें बड़ी मात्रा में पानी या भूमि की आवश्यकता नहीं होती है। यह घर पर या छोटे पैमाने पर किया जा सकता है।

हमें आशा है के मशरूम की खेती कैसे करे से जुड़ा यह लेख आपको पसंद आया होगा अन्य जानकारी के लिए आप हमारे यूट्यूब चैनल देसी किसान पर इससे जुड़ी सारी जानकारी विस्तार से प्राप्त कर सकते हैं|

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