किसान क्रेडिट कार्ड मे स्केल ऑफ फाइनेंस क्या है?

स्केल ऑफ फाइनेंस

किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card) में “स्केल ऑफ फाइनेंस” एक महत्वपूर्ण वित्तीय पैमाना है जिससे किसान क्रेडिट कार्ड मे दिए जा रहे ऋण की राशि का निर्धारण किया जाता है। यह राशि उस किसान के खेती एवं पशुपालन जैसे क्षेत्र में उपयोग के लिए होती है। किसान क्रेडिट कार्ड के स्केल ऑफ फाइनेंस का निर्धारण विभिन्न जिलों के अनुसार होता है। यह निर्धारण स्थानीय संभाव्यता, कृषि उत्पादों के प्रकार, कृषि विधि, जलवायु, और अन्य संबंधित कारकों पर आधारित होता है।

स्केल ऑफ फाइनेंस का निर्धारण कौन करता है?

स्केल ऑफ फाइनेंस को जिला स्तरीय तकनीकी समिति (GLTC) के द्वारा निर्धारित किया है,

जिला स्तरीय तकनीकी समिति (GLTC) एक सरकारी समिति है जो विभिन्न विकास योजनाओं और परियोजनाओं के प्रस्तावना पर मूल्यांकन और तकनीकी समर्थन का काम करती है। यह समिति जिला स्तर पर स्थापित की जाती है और स्थानीय स्तर पर विकास के लिए उचित और व्यवसायिक प्रस्तावों का विश्लेषण करती है। जीएलटीसी का प्रमुख उच्च स्तरीय अधिकारी अथवा जिला उपायुक्त होता है, जिसके नेतृत्व में समिति के सदस्यों का चयन किया जाता है।

जिला स्तरीय तकनीकी समिति के कुछ मुख्य कार्य क्षेत्र हैं:

  • विभिन्न विकास योजनाओं और परियोजनाओं के लिए तकनीकी समर्थन प्रदान करना।
  • प्रस्तावित परियोजनाओं को मूल्यांकन करना और उनकी व्यवस्था करना।
  • विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के लिए बजट और निधि का आवंटन करना।
  • जिले के स्थानीय समृद्धि के लिए उद्योग एवं कृषि क्षेत्र में उपायुक्त योजनाएं सुझाव देना।
  • सरकारी योजनाओं के लिए जिले के स्तर पर अनुमानित लाभ और उनके प्रभाव का अध्ययन करना।

जिला स्तरीय तकनीकी समिति के सदस्य:

जिला स्तरीय तकनीकी समिति (DLTC) के सदस्यों की सूची जिला प्रशासन द्वारा तैयार की जाएगी, जिसमें जिला केंद्रीय सहकारी बैंक संघ को उपाध्यक्ष (कनवेनर) के रूप में शामिल किया जाता है, जिला कलेक्टर / जिला मजिस्ट्रेट, समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। उनकी अनुपस्थिति में, जिले के कृषि विभाग के प्रमुख समिति की बैठक का अध्यक्षीय कर सकते हैं।

समिति के सदस्यता में एलडीएम, नाबार्ड के डीडीएम / डीडीओ, कृषि, पशुपालन और मत्स्य प्राधिकरणों के प्रतिनिधि, प्रमुख वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, प्रमुख गैर सरकारी संगठन और जिले से कुछ प्रगतिशील किसान हो सकते हैं। समिति के नियमित सदस्यों में केवीके / कृषि विश्वविद्यालय / पशु विश्वविद्यालय / मत्स्य शिक्षण संस्थान या विश्वविद्यालय / आईसीएआर क्षेत्रीय अनुसंधान स्टेशन / एटमा आदि के प्रतिनिधि भी शामिल हो सकते हैं और तकनीकी विशेषज्ञ सहायता के लिए उन्हें आमंत्रित किया जा सकता है।

स्केल ऑफ फाइनेंस कैसे निर्धारित होती है?

विभिन्न कृषि-जलवायुकीय क्षेत्र, फसल विकास पद्धतियों, आदि को ध्यान में रखकर सोचविचार के बाद जिले में उगाई जाने वाली सभी प्रमुख फसलों के लिए प्रति एकड़ आधार पर स्केल ऑफ फाइनेंस (SoF) तय किया जाता है। सभी फसलों, उद्यानी फसलों, पशुपालन गतिविधियों और मत्स्य सक्रियताओं के लिए इसका निर्धारण किया जाता है। स्केल ऑफ फाइनेंस अलग अलग सीजन की फसलों के लिए अलग अलग निर्धारित होता है जैसे रबी की फसले, खरीफ की फसले।

स्केल ऑफ फाइनेंस

स्केल ऑफ फाइनेंस से 1 बीघे मे कितना KCC बनेगा:

स्केल ऑफ फाइनेंस

दिए गए स्केल ऑफ फाइनेंस मे अगर आप मिर्जापुर जिले का उदाहरण ले, इस स्केल ऑफ फाइनेंस मे धान की फसल के लिए 1 साल का sof 60785/- रुपये पर हेक्टेयर है और गेंहू का 52550/- रुआपीए दिया गया है, इस को पर बीघे मे परिवर्तित करे पर यह धान के लिए 15247/- रुपये पर बीघा और गेंहू के लिए 13182/- जिसका मतलब है के अगर आपका खेत मिर्जापुर मे है और आप साल मे दो फसलों की बुवाई करते है तो 1 बीघे पर आपकी किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट 28500/- रुपये होगी।

ध्यान देने योग्य बात यह है की कई जिलों मे जिला अधिकारी के आदेशानुसार यह लिमिट 200% दी जाती है, ये जानकारी आपको बैंक से मिल सकती है, इस अनुसार ये लिमिट 55000/- के करीब हो जाएगी। इस पर बैंक अपनी तरफ से फसल कटाई के बाद/घरेलू/उपभोग आवश्यकताओं के लिए इस लिमिट का 10% और कृषि संपत्तियों की मरम्मत और रखरखाव के खर्च के लिए इस लिमिट का 20 % देता है।

ध्यान दे बैंक केवल आपके खसरा पर चढ़ी हुई उन्ही फसलों को लिमिट निर्धारण की लिए लेता है जो सिंचित होती है, अगर आप किसी फसल की बुवाई कर रहे है किन्तु वो आपके खसरे पर नहीं है तो बैंक ऐसी फसल को लिमिट निर्धारण से निकाल देता है।

Ref: Nabard

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अत: स्केल ऑफ़ फ़ाइनेंस एक महत्वपूर्ण कारक है जो किसानों के लिए उपलब्ध ऋण की मात्रा का निर्धारण करता है।

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